सोमवार, 15 नवंबर 2010

चिट्ठी नहिं लिखल होयत ...पैर में फ़ोंका अईछ....हैयाह बजला झाजी




कहने छलौं न कि ,,जे मोन होयत आ जखनहिं मोन होयत ...धडाधड लिख देब ..लिय तो मैथिलि बजय लिखय , पढय वा सुनय लेल ..हम अहि बात के प्रतीक्षा करू कि ..पत्रा के हिसाब से देखियै कि आय ..मसान्त मसदघ्दा त नहिं अईछ ...मारू ..ई थोडे होय छै यौ ....आय हमरा एकटा खिस्सा ...गोनू झा के मोन आबि रहल अईछ ..। आब ई त हम नहिएं पूछब कि ..गोनू झा के ,, कि विद्यापति के ..जनैत छीयैन न ...ई त मैथिली के पर्याववाची सब छाईथ ।


एक बेर गाम के एकटा मसोम्मात काकी , के अपना बेटी के सासुर किछ समाद पठेबाक छ्लईन । कियो अबय जाय बला नहिं भेट रहल छलईन । थाकि हारि क ..बिदा भेली गोनू झा सं एकटा चिट्ठी लिखबबय लेल ।


हौ गोनू , एकटा चारि पांइत के चिट्ठी लिख दै ।

काकी अखैन नहिं , बाद में आयब ।

अगिला दिन फ़ेर काकी पहुंचली ।

वैह जवाब , नहिं काकी बाद में आयब ।

तेसर दिन , हौ गोनू तों त एना भरिया रहल छ जेना काकी तोरा सं , दुर्गा सप्तशती लिखा लेथुन ।

नहिं काकी , ई गप्प नहिं अईछ , हम लिख त दितौं मुदा हमरा पैर में फ़ोंका भ गेल अईछ ।

काकी सुनैत देरी ..भन्ना गेली । लगली डिरियाबय ....

पंचैती बसा देलाईथ , देखियौ ..यौ पंच लोकनि ...ई टटीबा गोनू एतेक दिन तक हमरा दौडाबईत रहल , आ बाद में कहैत अईछ जे पैर में फ़ोंका भ गेल अईछ , कहू त अहां सब ई उचित होय ।

ऐं हौ गोनू ..ई सत बात छियैक ??

हं पंच लोकैन ..ई त सत बाजि रहल छाईथ काकी ।

तहन त ई उचित गप्प नहिं छी अहां ऐना कियैक केलियै ?

गोनू झा बजला , " यौ त की गलत बजलौं । हमर अक्षर एहेन होईत अईछ कि हमर लिखल ..हमहीं टा पढि सकैत छी । तो चिट्ठी लिखला बाद काकी के बेटी गाम जाय क चिट्ठी पढय लेल जहन हमरा बजायल जईतै त हम केना जईतौं ..पैर में फ़ोंका अईछ ।


काकी सहित सब पंच सब मुस्का उठलैथ .......

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह झा जी मजा आइब गेल | बढ़िया लिख्लाहूँ अहिना लिखित रहू | हमहू किछु मैथिलि में लिखवाक प्रयास करब | मन गद-गद भय गेल |

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  2. मैथिली में समझने में थोडा संघर्ष है

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